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Wednesday, August 28, 2013

TUM AANA BHOOL GAYE …/ तुम आना भूल गये.…



Dhamaniyon mein bahti 
bhavnaon ki tarah,
nashwar jeevan ki
shwas ki tarah,
avadharit tha tumahara aana.
Par tum
uljhe rahe jatil neel ki
parakashtha napne mein.
Dekho,
megh ke chhal se bachkar
chandni bhi chali ayi.
Indradhanush,tum aana bhool gaye ?
Dekho,
dhoop ka ik sunhara tukda
rango ke intzaar mein
abhi bhi baitha hai
chupchap mere sirhane..




धमनियों में बहती 
भावनाओं की तरह,
नश्वर जीवन की
श्वास की तरह,
अवधारित था तुम्हारा आना.
पर तुम
उलझे रहे जटिल नील की 
पराकाष्ठा नापने में.
देखो,
मेघ के छल से बचकर
चाँदनी भी चली आई.
इंद्रधनुष,तुम आना भूल गये ?
देखो,
धूप का इक सुनहरा टुकड़ा
रंगो के इंतज़ार में
अभी भी बैठा है
चुपचाप मेरे सिरहाने..




PIC -ticktackkirsten.xanga.com

37 comments:

  1. लाजवाब


    सादर

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  2. इंद्रधनुष,तुम आना भूल गये ?
    देखो,
    धूप का इक सुनहरा टुकड़ा
    रंगो के इंतज़ार में
    अभी भी बैठा है
    चुपचाप मेरे सिरहाने..
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !

    ReplyDelete
  3. दिल से निकली हुई भावमयी प्यारी रचना !!

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    Replies
    1. bohat bohat shukriya aapka Ranjana ji

      Delete
  4. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति..अपर्णा जी!

    ~सादर!!!

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    Replies
    1. शुक्रिया अनिता जी

      Delete
  5. ''अपर्णा'' जी यूँ तो आपने सुन्दर ढंग से प्रकृति की छटा बिखेरी है।
    पर ये पंक्तियाँ बेहद मार्मिक और सत्य है आज के दौर में :
    ''उलझे रहे जटिल नील की
    पराकाष्ठा नापने में.''
    हाँ ! आज इंसां भी अपने अभिलाषा की पूर्ति में
    सब कुछ भूल उलझा उलझा सा है।
    बेहद सुन्दर रचना

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    Replies
    1. आपकी सार्थक टिपण्णी ने कविता के भाव को बहुत सुन्दरता से उकेरा है। धन्यवाद अभिषेक जी

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  6. गहन अभिवयक्ति......

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    Replies
    1. आभार सुषमा जी

      Delete
  7. वाह ! बहुत ही सुंदर ! लाजवाब अभिव्यक्ति अपर्णा जी ! जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें !

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    Replies
    1. बहुत बहुत आभार दीदी। इसी प्रकार अपना स्नेह बनाये रखिये। आपको एवं आपके परिवार जनों को श्री कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  8. Replies
    1. बहुत बहुत शुक्रिया रीता जी

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  9. Replies
    1. आभार आपका विन्नी जी

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  10. धूप ओर नमी के आने पे इन्द्रधनुष आए ये जरूरी नहीं ... शायद उसे प्रेम का इंतज़ार है ...
    जो जाने कब होगा ...

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    Replies
    1. जी…. इन्द्रधनुष का भी 'दिल'होता है

      Delete
  11. अवधारित था तुम्हारा आना.
    पर तुम
    उलझे रहे जटिल नील की
    पराकाष्ठा नापने में.

    बहुत सुंदर

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    Replies
    1. शुक्रिया इस कविता को पढ़ने के लिए

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  12. वाह , मन के सच्चे भाव , विरह की व्यथा भी और शिकायत भी ।

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  13. बहुत सुंदर , प्यारी सी अभिव्यक्ति । बधाई आपको ।

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    Replies
    1. आपका बहुत बहुत आभार अन्नपूर्णा जी।

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    2. thank you for joining my site Annapurna ji

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  14. अत्यन्त हर्ष के साथ सूचित कर रही हूँ कि
    आपकी इस बेहतरीन रचना की चर्चा शुक्रवार 30-08-2013 के .....राज कोई खुला या खुली बात की : चर्चा मंच 1353 ....शुक्रवारीय अंक.... पर भी होगी!
    सादर...!

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    Replies
    1. सहर्ष आभार यशोदा जी।

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  15. Beautiful indeed.... The feel is way more powerful than th words....

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    Replies
    1. Glad that you liked this composition Moulshree.thank you for the encouragement.

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  16. Aparna ji ..... awesome expression as u have pointed in ur top quote that Its Ethereal mind encapsulated
    in a poetic envelope ......... I really appreciate the line....... //मेघ के छल से बचकर
    चाँदनी भी चली आई.
    इंद्रधनुष,तुम आना भूल गये / congrts to u for such high words pool

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    Replies
    1. Thank you so much for the kind words Poonam. I am glad that you liked this composition.much appreciated :)

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  17. Asadharan. This is totally uncommon.I am try to join in the deeper line of this lyric.

    ReplyDelete
    Replies
    1. dhonyobad.. yes ,'jatil neel', indradhanush' and 'dhoop'could well be called metaphors which highlight the different aspects of our life...

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